Thursday, May 22, 2008

गीली मिटटी की खुशबु

आज तपती हुई दोपहर के बाद शाम ने मौसम रंगीन बनाया... कुछ पानी की बूंदे और धरती महक उठी... कुछ यादें ताजा हुई ... बचपन में पहेली बारिश में भीगने का मजा ही कुछ और था... आज कार्पोरेट जीवन से ख़ुद को अलग करके छत पर नाचना हम भूलने लगे है... कोई लौटा दे मुझे वह दिन !!

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